Sunday, December 5, 2021
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पेटीएम की नई प्रणाली के साथ, एसएमबी एकीकृत मंच पर बिलों का भुगतान कर सकते हैं

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Paytm

लघु और मध्यम व्यवसाय (एसएमबी) जो अपने उपयोगिता बिलों को मैन्युअल रूप से संसाधित करते हैं, अक्सर मानव त्रुटि के कारण कुछ भुगतान गायब हो जाते हैं। उन्हें ऐसे बिलों के भुगतान और सामंजस्य को संभालने के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा।

फिनटेक गेंडा पेटीएम का एंटरप्राइज बिल पेमेंट सिस्टम (EBPS) यूनीफ़ाइड प्लेटफ़ॉर्म पर बड़ी संख्या में स्थानों पर उत्पन्न SMBs को प्रबंधित करने और उपयोगिता बिलों का भुगतान करने की अनुमति देकर इस समस्या को कम करने का लक्ष्य है।

पेटीएम का कहना है कि ईबीपीएस ऐसे व्यवसायों को उनकी प्रशासनिक लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और पेनल्टी से बचने और भुगतान भुगतान छूट को अनलॉक करके बिल राशियों को बचाने में मदद करता है।

पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा कहते हैं, “ईबीपीएस एसएमबी को उनकी दुकानों, कार्यालयों और गोदामों से मोबाइल, गैस, पानी के बिलों का प्रबंधन और भुगतान करने में सक्षम बनाता है।” “यह भारत में व्यवसायों के लिए एकमात्र एकीकृत उपयोगिता बिल प्रबंधन सेवा है।”

पेटीएम पेआउट का हिस्सा, ईबीपीएस को पार करने की उम्मीद है 3,000 करोड़ रु कंपनी द्वारा फरवरी 2021 के अनुमान के अनुसार इस वित्तीय वर्ष के अंत तक लेनदेन।

के साथ एक साक्षात्कार में SMBStory, शर्मा बताते हैं कि ईबीपीएस कैसे काम करता है और यह उपयोगी क्यों है।

संपादित अंश:

SMBStory: EBPS कैसे काम करता है और SMBs इस सेवा का उपयोग किन प्लेटफार्मों पर कर सकता है?

प्रवीण शर्मा [PS]: पेटीएम पेआउट व्यापारियों को सरल और संगठित तरीके से बिल भुगतान का प्रबंधन करने की अनुमति देता है। व्यापारी प्रत्येक दुकान, गोदाम या कार्यालय के लिए अलग-अलग स्टोर बना सकते हैं और प्रत्येक स्टोर के खिलाफ बिल जोड़ सकते हैं। ईबीपीएस स्वचालित रूप से बिलर्स से बिल प्राप्त करेगा और अतिदेय बिल और कुल बिल का समेकित दृश्य प्रदान करेगा।

इस राशि को कंपनी और व्यक्तिगत स्टोर और गोदाम दोनों के लिए ट्रैक किया जा सकता है। जब भी कोई बिल जोड़ा जाता है, तो उसका विवरण सिस्टम द्वारा स्वत: मान्य कर दिया जाता है और भुगतान के लिए किसी भी बकाया राशि को बिलर से स्वचालित रूप से प्राप्त किया जाता है।

पेटीएम पेआउट एक व्यक्तिगत बिल को जोड़ने के बिना बल्क मोबाइल रिचार्ज की अनुमति देता है। यह सुविधा एसएमबी के लिए महत्वपूर्ण है जो कर्मचारियों को मासिक फोन प्रतिपूर्ति करती है। इसके लिए फोन नंबर और प्रतिपूर्ति की जाने वाली राशि की जानकारी की आवश्यकता होती है।

इसके अतिरिक्त, प्रीपेड मोबाइल बिलों के लिए, डैशबोर्ड से रिचार्ज प्लान का चयन किया जा सकता है। व्यवसाय भी पोस्ट-पेड योजनाओं के लिए कर्मचारी मोबाइल बिल भुगतान को स्वचालित कर सकते हैं।

EBPS में, संगठन अनुकूलित अनुमोदन वर्कफ़्लोज़ सेट कर सकते हैं जो अनुपालन सुनिश्चित करते हैं और बिलों का भुगतान करने से पहले आवश्यक अनुमोदन लिया जाता है। एक बार बिल भुगतान अनुरोध को वर्कफ़्लो में निर्धारित सभी अनुमोदनकर्ताओं द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद, बिल भुगतान के लिए खाते से राशि जारी की जाती है।

SMBS: आपने इस सेवा का निर्माण कैसे किया?

पुनश्च: पेटीएम भारत में 95 प्रतिशत बिलर्स के साथ एकीकृत है, जो लंबित बिलों, मूल बिलों, और सर्वोत्तम सेवाओं और सफलता दरों के लगभग वास्तविक समय के दृश्य प्रदान करता है। आप एक बार में हजारों बिलों का भुगतान कर सकते हैं।

हमने जो कुछ भी किया है, वह भारतीय व्यवसायों के लिए इस तरह के उत्पाद के उपयोग में आसानी को बढ़ाता है, यह देखते हुए कि उनकी कंपनी में कई स्टोर और वेयरहाउस और अनुमोदन मैट्रिस हैं। यह एसएमबी के लिए उपरोक्त चीजों को प्रबंधित करने के लिए बनाए गए एक अनुकूलित सॉफ्टवेयर पर निर्भर करता है और यही उनके लिए मूल्य बनाता है।

पेटीएम, विजय शेखर शर्मा
Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा हैं

एसएमबीएस: ईबीपीएस का उपयोग करने के कुछ फायदे क्या हैं?

पुनश्च: EBPS का उपयोग करने के कुछ फायदे इस प्रकार हैं:

एकल-क्लिक भुगतान: व्यवसाय स्थान, देय तिथियों, बिल प्रदाताओं आदि के आधार पर बिलों को आसानी से फ़िल्टर कर सकते हैं और थोक भुगतान विकल्प का उपयोग करके एक क्लिक के साथ हजारों बिलों का भुगतान कर सकते हैं।

स्थान प्रबंधन: हर दुकान, कार्यालय, गोदाम और स्थान के लिए बिल एक डैशबोर्ड से आसानी से प्रबंधित किए जा सकते हैं।

आसान सामंजस्य: सेवा विभिन्न स्थानों के आधार पर परेशानी मुक्त सुलह और कस्टम रिपोर्ट प्रदान करती है। इसे मौजूदा उद्यम संसाधन योजना और अन्य वित्तीय रिपोर्टिंग प्रणालियों के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सकता है।

त्वरित अनुमोदन: ईबीपीएस में विभिन्न व्यावसायिक विभागों से अनुमोदन और अनुवर्ती बनाने के लिए कस्टम प्रवाह हैं।

आंशिक भुगतान: अग्रिम भुगतान करने या बिल की आंशिक राशि का भुगतान करने का विकल्प है।

अनुस्मारक: उपयोगकर्ता आसान अलर्ट सेट कर सकते हैं, ताकि वे बिल भुगतान से कभी न छूटें।

प्रारंभिक भुगतान ऑफ़र तक पहुंच: नियत तारीख से पहले भुगतान करके, व्यवसायों को 15 प्रतिशत तक छूट मिल सकती है।

बुद्धिमान और स्वचालित बिल लाने वाला तंत्र: यह सुनिश्चित करता है कि बिल समय पर और कुशलता से प्राप्त किए जाएं। विशेष अनुरोध प्रोत्साहन और ऑपरेटरों से दंड प्रणाली में बनाया गया है।

निधियों का स्मार्ट प्रबंधन: वॉलेट प्रौद्योगिकी के निर्माण में हमारे समृद्ध अनुभव के साथ, हम बिलों का भुगतान करने के लिए वास्तविक समय में अपने धन का प्रबंधन करने के लिए व्यवसायों तक इसे विस्तारित करने में सक्षम हैं।

उद्यमों के लिए पैमाने पर बनाया गया: बैक-एंड तकनीक एक क्लिक के साथ हजारों बिलों का भुगतान करने के लिए बनाई गई है; हजारों दुकानों का प्रबंधन; राशि, स्टोर, और बिलर के आधार पर जटिल अनुमोदन के लिए उद्यम-स्तर पहुंच परत है; और वास्तविक समय की सूचनाएं भेजता है, इसलिए आप एक बार भी देरी से भुगतान नहीं कर रहे हैं।

एसएमबीएस: क्या अन्य फिनटेक फर्मों से समान सेवाएं हैं? EBPS अलग कैसे है?

पुनश्च: यद्यपि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक चालू खातों पर सरल बिल भुगतान सेवा प्रदान करते हैं, पेटीएम पेआउट एसएमबी और बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए सबसे व्यापक समाधान प्रदान करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी विशेषताओं में स्टोर प्रबंधन, बिल स्पाइक इंडिकेटर के साथ स्वचालित भुगतान, बिल प्राप्तियां, अनुमोदन वर्कफ़्लो और एंटरप्राइज़ एक्सेस नियंत्रण शामिल हैं।

निर्मला सीतारमण के MSME क्षेत्र के लिए आर्थिक उपाय

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) ने राजस्व में तेज गिरावट के बाद वित्तीय सहायता की मांग की, जब भारत मार्च 2020 में लॉकडाउन में चला गया, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई के हिस्से के रूप में मई में पहलों की शुरुआत की। 20 लाख करोड़ रुपये का आत्मानिर्भर भारत प्रोत्साहन पैकेज।

MSMEs के लिए तीन नीतियां रु। 3 लाख करोड़ की संपार्श्विक-मुक्त ऋण योजना, 20,000-करोड़ की अधीनस्थ ऋण योजना और फ़ंड्स ऑफ़ फ़ंड्स (FoF) के माध्यम से 50,000-करोड़ रुपये के इक्विटी जलसेक हैं।

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना

3-लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना ने एमएसएमई के मालिकों के लिए फिर से शुरू करने और व्यवसाय और वेतन का भुगतान करने के लिए राहत की मांग की।

यह योजना एमएसएमई को बकाया ऋण का अतिरिक्त 20 प्रतिशत का लाभ उठाने के लिए कुल उधार के 25 करोड़ रुपये तक की अनुमति देती है। इस वृद्धिशील उधार की गारंटी सरकार द्वारा दी जाती है।

योजना की संरचना केवल मौजूदा ऋण वाले व्यवसायों को वृद्धिशील ऋण प्राप्त करने की अनुमति देती है।

अधीनस्थ ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना

इस योजना के तहत, सरकार तनावग्रस्त MSME को 20,000 करोड़ रुपये का अधीनस्थ ऋण प्रदान करती है। योजना के लिए फंड अगस्त में चालू किया गया था।

अधीनस्थ ऋण वह ऋण है जो अन्य ऋणों के बाद आता है यदि MSME परिसमापन में गिर जाता है या दिवालिया हो जाता है।

यह योजना MSMEs के लिए मान्य है जो SMA-2 खाते हैं (61 और 90 दिनों के बीच मूलधन या ब्याज भुगतान के साथ विशेष उल्लेख खाते) या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां, और 30 अप्रैल, 2020 तक, रिज़र्व बैंक के अनुसार पुनर्गठन के लिए पात्र हैं भारत के दिशा निर्देश

एफएम निर्मला सीतारमण

50,000 करोड़ रुपये का फंड

50,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स को पिछले साल मंजूरी दी गई थी 10,000 करोड़ रु इसमें से सरकार और बाकी उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी फर्मों से आते हैं। फंड MSMEs को विकास क्षमता और व्यवहार्यता के साथ लक्षित करेगा, और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने में उनकी मदद करने का लक्ष्य रखता है, यहां तक ​​कि वे इक्विटी की कमी का सामना करते हैं।

मई में इसकी घोषणा करते हुए, सीतारमण ने कहा कि फंड को मदर फंड और कुछ बेटी फंड के माध्यम से संचालित किया जाएगा ताकि MSMEs को आकार और क्षमता में विस्तार करने में सक्षम बनाया जा सके, और उन्हें स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य बोर्ड में सूचीबद्ध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य व्यवसायों की मदद करना है, जो उनके नवजात और प्रारंभिक चरणों में हैं, लेकिन पेशेवर निगमों या उद्यम पूंजीपतियों के माध्यम से धन जुटाने की लगभग कोई संभावना नहीं है। यह योजना उच्च-क्रेडिट एमएसएमई में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि पूंजी खरीदने का प्रस्ताव करती है।

बजट 2021 में उपाय

बजट 2021 के भाषण में एमएसएमई के लिए आर्थिक सुधार की सहायता के लिए तीन योजनाओं के अलावा सीतारमण ने इस क्षेत्र को 15,700 करोड़ रुपये आवंटित किए, इसके अलावा एक विशेष रूपरेखा बिछाने डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की सहायता के लिए।

घोषणा में, वित्त मंत्री ने कहा कि छोटी कंपनियों की परिभाषा को मौजूदा आधार सीमा को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये किया जाएगा और मौजूदा सीमा से टर्नओवर सीमा को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये किया जाएगा। 2 करोड़ रु। इससे उनकी अनुपालन आवश्यकताओं को आसान बनाने में दो लाख कंपनियों को लाभ होगा।

सरकार ने लगभग प्रतिबद्ध किया है 1.97 लाख करोड़ रु पांच साल से अधिक के लिए FY22 शुरू उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाएं Aatmanirbhar Bharat के लिए विनिर्माण नेता बनाना।

सीतारमण ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बोली में सीमा शुल्क में बदलावों की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले साल से, सरकार सीमा शुल्क की संरचना को ओवरहाल कर रही है और 80 पुरानी छूटों को समाप्त कर दिया है। इस साल 400 से अधिक छूटों की समीक्षा करने का प्रस्ताव करते हुए, उसने विकृतियों से मुक्त एक संशोधित सीमा शुल्क ड्यूटी को लागू करने का वादा किया।

पूर्व COVID घोषणाएँ

सीओवीआईडी ​​-19 महामारी से पहले, सीतारमण ने व्यापारियों और दुकानदारों के लिए खुदरा पेंशन लाभ योजना सहित एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। सरकार ने कहा कि इस योजना के तहत, सभी दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों, और स्वरोजगार करने वाले लोगों को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद 3,000 रुपये की न्यूनतम मासिक पेंशन का आश्वासन दिया जाएगा।

उधार देने को बढ़ावा देने के लिए, सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वांछित छाया बैंकों और खुदरा उधारकर्ताओं को उधार देने के लिए 400 जिलों में ऋण मेला आयोजित करने के लिए कहा था।

दिल्ली में रामराज्य की दस्तक? राजधानी में शराब पीने की उम्र घटी तो बोले पुण्य प्रसून बाजपेयी, यूजर्स दे रहे ऐसा रिएक्शन

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दिल्ली सरकार की तरफ़ से नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी गई है, जिसमें शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 वर्ष कर दी गई है। कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दी है, जिसमें यह कहा गया है कि राजधानी में शराब की कोई सरकारी दुकान नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली में अब शराब की कोई नई दुकान भी नहीं खुलेगी।

नई आबकारी नीति में शराब पीने की उम्र घटाने को लेकर तमाम लोग दिल्ली सरकार की आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इस नई नीति से नाखुश नजर आए। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी दिल्ली सरकार के इस फैसले पर अपनी टिप्पणी की है, जिस पर यूजर्स भी अपनी राय दे रहे हैं।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्विटर पर लिखा, ‘दिल्ली में रामराज्य की दस्तक? शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 साल…।’ उनके इस ट्वीट पर सिद्धार्थ सेतिया नाम के एक यूजर ने अन्य राज्यों में शराब पीने की उम्र का एक डाटा शेयर करते हुए लिखा, ‘जब देखो तंज कसते रहते हो, इतनी नफ़रत दिल्ली से है या केजरीवाल से? सेलेक्टिव जर्नलिज्म करके थकते नहीं हो?’

गौरव नाम के यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, ‘हां जैसे जिन राज्यों में शराब बंद है वहां तो घी के दीए जलते हैं शाम को।’ कर्म योगी नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘किसी भी सरकार का कोई फैसला रामराज्य का ही फैसला हो, ये कटाक्ष कुछ ज्यादा ही है। किसी भी फैसले के कुछ अच्छे- बुरे नतीजे हो सकते हैं। आप बस ऐसा सवाल उठाएं जिससे आपका उपहास न बनाया जाए और जो लोकहित में हो।’

अरुण कुमार गुप्ता नाम के एक यूजर ने दिल्ली सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए लिखा, ‘जब चुनाव में वोट देने की उम्र 18 वर्ष हो सकती है तो पीने की उम्र 21 साल क्यों नहीं हो सकती। चुनाव में व्यक्ति अपने राज्य या देश के भविष्य का निर्णय करता है जबकि पीने से केवल अपने और अपने परिवार का भविष्य।’

विवेक चौहान नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘यदि शराब पीने की उम्र बढ़ाकर 50 कर दी जाए तो क्या लोग 50 साल के होने तक शराब नहीं पिएंगे? ये ठीक वैसा ही होगा जैसे जिन राज्यों में शराबबंदी लागू है वहां आप आसानी से अधिक पैसे देकर जितना चाहे शराब खरीद सकते हैं। यानी शराबबंदी से सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ता है और कुछ नहीं।’

आपको बता दें कि सितंबर 2020 में ही दिल्ली सरकार ने आबकारी आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई थी। दिल्ली सरकार के लिए सबसे बड़ा राजस्व का स्रोत शराब ही है, ऐसे में नई आबकारी नीति से सरकार को और अधिक लाभ होने की उम्मीद है।

ये अच्छा मौका है, सब साफ करने का- BJP नेता से बोले अर्णब; शिवसेना प्रवक्ता ने कहा- पहले नार्को टेस्ट की बात करो

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रिपब्लिक टीवी पर अपने शो में अर्णब गोस्वामी ने बीजेपी नेता रामकदम से कहा कि ये अच्छा मौका है, सब साफ करने का। शिवसेना प्रवक्ता किशोर तिवारी ने इस पर कहा कि पहले नार्को टेस्ट की बात करो। उनका कहना था कि परमवीर सिंह का नार्को टेस्ट हो, तभी सारे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

बीजेपी नेता राम कदम का कहना था कि एंटीलिया मामले का सारा सच तभी सामने आ सकता है जब इससे जुड़े सारे लोगों का नार्को टेस्ट कराया जाए। रामकदम ने कहा कि आजाद भारत में इससे घृणित घटना कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सदन में मामले को नहीं उठाते तो यह हमेशा के लिए कहीं पर दफन हो जाता। किसी आरोपी को बख्शना नहीं चाहिए।

अर्णब गोस्वामी ने शिव सेना प्रवक्ता किशोर तिवारी से कहा, आप कह सकते हैं कि मैं बीजेपी का समर्थन करता हूं, लेकिन यह सच है कि देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी असेंबली में इस मामले को नहीं उठाती तो सचिन वाजे का सच सामने नहीं आता। फडणवीस ने आक्रामक तौर पर इस मामले को लोगों के सामने रखा। उनका कहना है कि शिवसेना के नेता मामले को दबाने की फिराक में थे।

अर्णब का कहना था कि भारत की आर्थिक राजधानी में जिस तरह से एक पुलिस वाला मनमानी कर रहा था, उस पर परदा ही पड़ा रहता। इसके लिए वह बीजेपी का धन्यवाद करते हैं। जिसने इतने बड़े गोरखधंधे को सरकार और लोगों के सामने रखा। उनकी वजह से ही इस मामले में अब जोरदार कार्रवाई हो रही है। उन्होंने शिवसेना के प्रवक्ता को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश डिबेट के दौरान की।

जदयू के अजय आलोक ने कहा कि परमवीर को अब तक महाराष्ट्र सरकार सस्पेंड क्यों नहीं कर रही है। उनका कहना था कि ठाकरे डर रहे हैं कि परमवीर पर कार्रवाई की तो वह मुंह खोलेगा। इसी वजह से लेटर बम फोड़ने के बाद भी उन पर हाथ नहीं डाल रहे। उनका कहना था कि इसकी कोर्ट की निगरानी में जांच करानी चाहिए। तभी मामले का सारा सच निकलकर सामने आएगा। संघ के अवनिजेश अवस्थी ने कहा कि परमवीर को अब कोई नहीं बचा सकता। उसके बुरे कर्म सामने आ रहे हैं|

अंकिता लोखंडे के दिल में भी था सुसाइड का ख्याल! टीवी एक्ट्रेस ने बताया-सुशांत सिंह राजपूत संग ब्रेकअप के बाद ऐसी हो गई थी हालत

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अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे। जब दोनों का ब्रेकअप हुआ तो फैंस काफी शॉक हुए थे, क्योंकि सुशांत और अंकिता का शादी का प्लान भी था। हाल ही में अंकिता ने सुशांत सिंह राजपूत को लेकर कुछ बातें कही हैं, जिसमें अंकिता ये भी बताती हैं कि आखिर दोनों के अलग होने की वजह क्या थी? अंकिता ने अपने ब्रेकअप को लेकर चुप्पी तोड़ी जिसमें उन्होंने ये तक कहा कि एक वक्त ऐसा आ गया था जब उन्होंने मौत को गले लगाने का भी सोचा था।

अंकिता और सुशांत साथ में टीवी सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ में काम कर चुके हैं। करीब 6 साल तक सुशांत और अंकिता लोखंडे साथ रिलेशनशिप में रहे। साल 2016 आते आते दोनों की राहें जुदा हो गईं। एक इंटरव्यू में अंकिता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में (Ankita Lokhande- Sushant Singh Rajput Breakup) चुप रहने का ही फैसला लिया था। अंकिता ने कहा कि वह इस बात पर कोई तमाशा नहीं चाहती थीं। वो नहीं चाहती थीं कि उनके रिलेशनशिप की बातें उछलें।

ढाई साल तक परेशानियों से जूझती रहीं अंकिता: ऐसे में उन्होंने ये चुप्पी बनाए रखी और सुशांत को इसके लिए ब्लेम भी नहीं किया। बॉलीवुड बबल की रिपोर्ट के मुताबिक एक्ट्रेस ने बताया- ‘आज लोग मुझे आकर बोल रहे हैं, तुमने छोड़ा सुशांत को। कैसे पता आपको? किसी को इस बारे में कुछ नहीं पता न कोई खबर है कि क्या हुआ था! सुशांत को या किसी को भी मैं ब्लेंम नहीं कर रही हूं यहां। वह अपनी चीजों को लेकर क्लियर था। वह अपने करियर के साथ आगे बढ़ना चाहता था। ऐसे में उसने अपना करियर चुना और वो मूव-ऑन हो गया। लेकिन मैं ढाई साल तक अपनी कुछ परेशानियों से जूझती रही।’

सुशांत सिंह संग ब्रेक-अप के बाद हो गई थी ऐसी हालत: अंकिता ने बताया कि वह उन लोगों में से नहीं हैं जो कि जल्दी से मूव ऑन कर जाएं और काम पहर ध्यान दे पाएं। अंकिता ने बताया था कि मेरे लिए ये बहुत ही मुश्किल था, इस बीच मेरी फैमिली मेरे साथ खड़ी रही। मेरी जिंदगी खत्म हो गई थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि अब मुझे आगे क्या करना है। मैं किसी को यहां ब्लेम नहीं कर रही हूं, उसने अपना रास्ता चुना। मैंने उसे पूरा हक दिया कि चल ये तेरी जिंदगी है, तू जा। लेकिन मैं अपने आप में एक जंग लड़ रही थी।’

खुद को खत्म करने करने का भी आया ख्याल: अंकिता ने अपने खराब वक्त को लेकर बयां किया कि- ‘मैं अपने बेड से खड़ी नहीं हो पाती थी, न किसी से बात कर पाती थी। अपने माता पिता तक से मैं बात नहीं कर पाती थी। आपके दिमाग में इस वक्त चीजें चलती हैं कि मैं क्या करूं, मैं खुद को खत्म कर सकती थी उस वक्त ऐसा था। ऐसी बातें आप सोचते हो। लेकिन फिर बात में मैं इन चीजों से बाहर निकली।’

बता दें, अंकिता लोखंडे ने कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका से बॉलीवुड में हाई जंप मारी थी। हालांकि इससे पहले भी उन्हें कई फिल्में ऑपर हुआ थीं जिसमें से एक संजय लीला भंसाली की रामलीला भी रही। अंकिता लोखंडे ने बताया था कि वो सुशांत सिंह राजपूत से शादी करना चाहतीं थीं इसलिए उन्होंने हैप्पी न्यू ईयर, राम लीला, सुल्तान और बाजीराव मस्तानी जैसे फिल्में भी छोड़ दी थीं। बताते चलें सुशांत सिंह राजपूत लोखंडे से अलग होने के बाद अपने करियर में अच्छा कर रहे थे। वहीं वह एक्ट्रेस  रिया चक्रवर्ती के साथ रिलेशनशिप में भी आ गए थे। सुशांत सिंह राजपूत को 14 जून 2020 को दिन में मुंबई के बांद्रा स्थित उनके घर में मृत पाया गया था।

 

जब अवॉर्ड फंक्शन में सीट से खड़ी होकर झूमने लगीं ‘दया भाभी; दिशा वकानी को देख ‘तारक मेहता’ ने बजा दी सीटी

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शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ दर्शकों का फेवरेट शो है। जिसमें दया बेन का उनके फैंस को आज भी इंतजार है। दया बेन TMKOC में तो इन दिनों नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में फैंस उन्हें ढूढ़ते हुए दिशा वकानी (Disha Vakani) के इंस्टा पोस्ट तक पहुंच जाते हैं। दिशा को दया बेन के रूप में देखने के लिए लोग उनका इंतजार करते हैं।

अब दिशा ने कुछ दिनों पहले एक पोस्ट शेयर किया जिसमें वह एक अवॉर्ड फंक्शन में शिरकत करती दिखीं, इस बीच दिशा का अनोखा अंदाज देखने को मिला। पीच कलर की साड़ी पहन कर दिशा फंक्शन में एंजॉय करती दिखती हैं। दिशा वकानी वीडियो में अचानक अपनी कुर्सी से उठती हैं और डांस करने लगती हैं। वहीं कुछ दूसरी पर tmkoc के तारक मेहता यानी शैलेश लोढा बैठे होते हैं जो कि ‘दया भाभी’ को ऐसे डांस करते देख खुश हो जाते हैं और सीटी मारने लगते हैं।

दिशा वकानी ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से स्माइल वाली इमोजी शेयर किया है। दिशा के फैंस भी वीडियो को फनी रिएक्शन दे रहे हैं तो वहीं कई लोग दिशा से वही एक सवाल करते दिख रहे हैं कि वह शो TMKOC में वापसी कब करेंगी। दिशा शो में अपनी री-एंट्री को लेकर यू तो कई पोस्ट कर चुकी हैं।

इतना ही नहीं वह तो साफ साफ कई बार अपने पोस्ट में भी कह चुकी हैं वह शो पर वापस आ रही हैं। इस बाबत उन्होंने ऐसे दो तीन पोस्ट डाले थे जिसमें उन्होंने अपने फैंस को बताया था कि वह तारक मेहता के सेट पर शूटिंग कर रही हैं।

तो वहीं दया कुछ वक्त पहले तारक मेहता के एक एपिसोड में भी कुछ सेकेंड्स के लिए अपनी झलक दिखा कर गई थीं। हालांकि बीच में एक खबर आई थी जिसे देख कर एक्ट्रेस के फैंस का दिल टूट गया था।

दिशा वकानी की शो में वापसी को लेकर कोईमोई के एक इंटरव्यू में सामने आया था कि एक्ट्रेस TMKOC में वापसी नहीं कर पाएंगी। इस शो के करीबी सोर्स ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा था कि अब दिशा वकानी शो में कभी वापस नहीं आएंगी।

उन्होंने कहा, “मेटर्निटी लीव के बाद से दिशा वकानी को शो में वापस लाने के बारे में काफी बातचीत हुई थी। निर्माता दिशा के संपर्क में थे और कुछ बातचीत चल रही थी, जिन पर काम किया जा रहा था। लेकिन दुर्भाग्य से, बातचीत कामयाब नहीं हो पाईं और दिशा ने शो को छोड़ने का फैसला किया।” ऐसे में फैंस अभी भी दिशा की वापसी को लेकर दुविधा में हैं।

कंगना रनौत के लिए आसान नहीं था ‘थलाइवी’ में जयललिता का किरदार, बढ़ाना पड़ा 20 किलो वजन, देखें- Images

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Kangana Ranaut

Thalaivi Trailer, Kangana Ranaut: कंगना रनौत की फिल्म थलाइवी का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिल्म में कंगना का किरदार बहुत शानदार और जानदार है, जिसके लिए उन्होंने खूब मेहनत की है। कंगना ने इस फिल्म के लिए अपने लुक से लेकर वजन, ड्रेसिंग सेंस और वेट तक को लेकर बारीक से बारीक ध्यान रखा है। इसके बाद जाकर फिल्म तैयार हुई है और अब फिल्म का ट्रेलर लॉन्च होने जा रहा है।

कंगना ने इस बारे में एक ट्वीट किया और साथ में फिल्म से 3 तस्वीरें शेयर कीं जिसे देख कर फैंस काफी उत्साहित हो गए। एक्ट्रेस ने बताया कि फिल्म का ट्रेलर 22 मार्च को रिलीज होने जा रहा है। कंगना ने इस दौरान ये भी बताया कि उन्होंने ‘थलाइवी’ के लिए 20 किलो वेट बढ़ाया और फिर उस सारे फैट को फिर से घटाया भी। ये सब एक्ट्रेस ने कुछ महीनों के वर्कआउट से किया।

कैसे लूज किया कंगना ने 20 किलो वजन: एक्ट्रेस ने ये भी बताया कि इसके अलावा और भी कई चैलेंज थे जिन्हें कंगना को इस फिल्म को पूरा करने के लिए करना था। जब लॉकडाउन चल रहा था उस वक्त ही घर पर रह कर बिना किसी जिम इक्वेप्मेंट के बगैर कंगना ने 5 किलो वजन घटाकर दिखाया था।

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कुछ वक्त पहले कंगना ने एक वीडियो शेयर किया था उसमें वह अपने इंस्ट्रक्टर के साथ एक्सरसाइज करती नजर आई थीं। उन्होंने इस वीडियो को शेयर कर लिखा था- 5 किलो वजन कम हो चुका है, अभी और रास्ता तय करना बाकी है।

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क्या है Kangana Ranaut का रुटीन: कंगना रनौत का शेड्यूल बहुत ही टाइट रहता है। कंगना के डेली रुटीन की बात करें तो खुद को फिट रखने के लिए कंगना रनौत पिलाटे्स करती हैं। पिलाटे्स को बॉलीवुड सेलेब्स बहुत पसंद करते हैं। कुछ दिनों पहले कंगना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें वह ट्रेनर नम्रता पुरोहित के साथ पिलाटे्स करते हुए दिखाई दी थीं।

Kangana Ranaut

कंगना अच्छा और हेल्दी खाना खाती हैं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीती हैं। वहीं फिट रहने के लिए रोजाना रनिंग करती हैं। कंगना ने अपना शेड्यूल कुछ ऐसे बनाया है कि वह हफ्ते में 5 दिन जिम करती हैं। 2 घंटे जिम में पसीना बहाने के बाद ही वह बाकी काम करती हैं।

‘दुनिया में दो तरह के गरीब हैं एक जो..’ सोनू सूद ने देश के अमीरों पर कसा तंज, पब्लिक ने भी खुलकर दिए रिएक्शन

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कोरोना काल में लॉकडाउन के बाद से सोनू सूद गरीबों के मसीहा बन कर उभरे हैं। ऐसे में तब से लेकर अब तक उनके द्वारा गरीबों की मदद करने का सिलसिला बरकरार है। सोनू सूद अपने ट्विटर अकाउंट से अपने हर फैन को जवाब देते हैं जो उनसे मदद मांगता है। ऐसे में सोनू सूद का एक पोस्ट सामने आया जिसमें वह देश के उन अमीरों पर तंज कसते दिखते हैं जो किसी की मदद नहीं करते। सोनू सूद अपने पोस्ट में बताते हैं कि दो तरह के गरीब असल में होते हैं।

सोनू सूद ने अपने पोस्ट में कहा- दुनिया में दो तरह के गरीब हैं एक जो हालातों से हैं। और दूसरे जो इन गरीबों की मदद नहीं कर पाए। यह दूसरे वाले पहले वालों से बड़े गरीब हैं। सोनू सूद के इस वाक्या को कई लोगों ने सही करार दिया। सोनू सूद के फैंस उनकी इस बात से सहमत नजर आए। वहीं उनके पोस्ट पर ढेरों कमेंट्स की बाढ़ भी आ गई।

सोनू की इस बात का समर्थन करते हुए दीपक ठाकुर नाम के यूजर ने कहा- लेकिन हिंदुस्तान में आप जैसा सिर्फ एक ही अमीर है! कई लोग इस बीच सोनू के फैंस उनके पास अपनी फरियाद लेकर भी पहुंचे। प्रमोद नाम के यूजर ने कमेंट कर कहा- हमारी सरकार का भी बड़ा योगदान होता है, हालात को बद से बदतर तक पहुंचाने में। 2008 से पीड़ित हैं.. 2015 से 2018 तक बहन ने मदद की गुहार लगाई। अब तो मरणासन्न अवस्था में पहुंच गए हैं। हमारे हक/अधिकार से हम वंचित हैं 2008 से। आपको मसीहा कहते हैं जग वाले। कम-से-कम एक बार आप हमारी सुन लो।

एक यूजर ने कविता की कुछ पंक्तियां लिख कमेंट किया- निर्धन गिरे पहाड़ से, कोई न पूछे हाल। धनी को कांटा जो लगे, पूछे लोग हजार। भारती नाम से एक यूजर ने कहा- तीसरे वो जो गरीबों की मदद कर के नगर नगर ढोल पीटते हैं। खुद को खुदा समझने लगते हैं (मसीहा) जो सहायता नहीं कर पाते, उनको नीचा दिखाते हैं। असल में वो सबसे ज्यादा गरीब हैं!

कंचन सिंह चौहान नाम की एक यूजर ने सोनू सूद को सुनाते हुए कहा- मदद करना बहुत अच्छी बात है ..tweet कर के बताना वो कुछ समझ नहीं आया …ऐसा लगा एहसास करा रहे हैं। रविश नाम के यूजर बोले- दूसरे वाले गरीबों में देश की मोदी सरकार का स्थान सबसे ऊपर आता है।

जीतू नाम के यूजर ने कमेंट किया- दुनिया में दो तरह के अमीर हैं। एक जो हालात के मारों और बेसहारा लोगों की मदद करके किसी को पता नहीं चलने देते। और दूसरे किसी मजबूर और लाचार इंसान की मदद करके उसकी लाचारी और बेबसी का पूरी दुनिया मे ढोल पीट देते हैं। ये दूसरे वाले अमीर से कोसो दूर रहना, ये मदद करके इज़्ज़त नीलाम कर देते हैं।



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भगवा और हिंदुत्व की ठेकेदार नहीं- कह चीखने लगे कांग्रेस प्रवक्ता, भाजपा सांसद और एक्ट्रेस से मिला ऐसा ज़वाब

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न्यूज 18 इंडिया की लाइव डिबेट में राम नाम और हिंदुत्व के मुद्दे पर एक्ट्रेस/ बीजेपी सांसद रूपा गांगुली और आचार्य प्रमोद कृष्णम के बीच तकरार हो गई। वहीं एक दूसर पर पलटवार भी जारी रहा। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस दौरान भड़कते हुए कहा- ‘भारत के अंदर राम का विरोध करना, मैं तो इसका बिलकुल समर्थन नहीं करता। लेकिन सवाल इस बात का है कि ममता बनर्जी, रूपा जी जरूरी बात की कि ममता जी का सरनेम तो हिंदू है लेकिन वे हिंदू हैं नहीं।’

आचार्य ने आगे कहा- ‘अरे भाई चलिए भ्रष्ट बंगाल में आप ममता को कहते हैं कि हिंदू नहीं हैं लेकिन जब उत्तर प्रदेश आता है तो आप प्रियंका गांधी को कहते हैं कि हिंदू नहीं हैं। राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर जाते हैं तो आप कहते हैं कि हिंदू नहीं हैं, पाखंड हो रहा है। जब वह केदारनाथ पैदल चल कर जाते हैं तो आप कहते हैं कि वो हिंदू नहीं हैं, उद्धव ठाकरे जब बीजेपी के साथ होते हैं तब आप कहते हैं हिंदू हृदय सम्राट। जब वो कांग्रेस के साथ होते हैं तब आप उन्हें हिंदू विरोधी कहते हैं?तो प्रश्न यटे पैदा होता है कि जो भारतीय जनता पार्टी के साथ है वो हिंदू है।’

उन्होंने आगे कहा- ‘वो हिंदुस्तानी है। जो भारतीय जनता पार्टी से सवाल करता है वो हिंदू नहीं है, वो हिंदुस्तानी नहीं है, वो राष्ट्र भक्त नहीं है ये सवाल उठता है। तो क्या रूपा गांगुली जी अपनी पार्टी के तमाम प्रवक्ताओं को आप बताएंगी कि जिस शालीनता से आप ये कह रही हैं, उसी शालीनता से आपकी पार्टी के बाकी प्रवक्ता भी समर्थन करेंगे? कि भाई भारतीय जनता पार्टी अकेली पार्टी नहीं है हिंदुत्व के लिए।’

उन्होंने आगे कहा- ‘भारतीय जना पार्टी भगवा की ठेकेदार नहीं है। भारतीय जनता पार्टी का राम पर कोई पेटेंट नहीं है। राम सबके हैं। राम उनके भी है जो उनका विरोध करते हैं। इसलिए राम के नाम पर सियासत नहीं होनी चाहिए।’

इस पर रूपा गांगुली जवाब देती हैं- ‘अच्छी बात है, बहुत अच्छी बात है आज इस देश में सारे लोग राम का नाम लेते हैं। राम के नाम से सचमुच विभाजन नहीं होना चाहिए। आपने सही कहा सभी को राम नाम पर भरोसा होना चाहिए। यही तो हम लोग चाहते हैं राजनीति अलग हो लेकिन राम नाम पर भरोसा सभी को होना चाहिए। आज पार्टी के सारे लोग जो देश में कह रहे हैं कि राम सबके हैं, ये सुनकर सचमुच अच्छा लगा। ये ही तो योगी जी ने कहा है कि आज ममता को भी चंडी पाठ करना पड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के डर से आझ सभी को राम नाम की तारीफ करनी पड़ रही है।’

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने रूपा गांगुली की बात पर पलटवार कर कहा- ‘आज ममताजी पर सब ऐसे टूट पड़े हैं जैसे द्रौपदी पर कौरव टूट पड़े थे ऐसे में अगर वो चंडी को याद कर रहीं हैं तो इसमें बुरा क्या है।’ उन्होंने कहा- भाई जब इंसान दुखी करता है तभी तो लोगों को भगवान याद आते हैं। ऐसे में बात को काटते हुए एंकर अमीश देवगन पूछते हैं कि आप कहना चाहते हैं कि ममता बनर्जी इस वक्त दुखी हैं? तो आचार्य कहते हैं- महिलाओं की पीढ़ा नारी का अपमान महाभारत में भी करने का प्रयास किया गया। तब भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे। रूपा गांगुली जी ने भी इसे अच्छे से निभाया था उस वक्त। बिलकुल सब ऐसे टूट रह हैं जैसे दौपदी के ऊपर कौरव टूट रहे थे।



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सलमान खान की बड़ी फैन रह चुकी हैं ऐश्वर्या राय की ननद, श्वेता नंदा ने सुपरस्टार की चाह में किए इस तरह के काम

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अमिताभ बच्चन की बेटी और अभिषेक बच्चन की बहन श्वेता नंदा अकसर सुर्खियों में रहती हैं। एक समय था जब श्वेता नंदा सलमान खान को बहुत चाहती थीं, उन्हें पसंद करती थीं। इधर, ऐश्वर्या राय और सलमान खान का रिश्ता जगजाहिर है। वहीं एक जमाने में श्वेता को सलमान इतने पसंद आ गए थे कि उन्होंने सलमान की पूरी फिल्म रिकॉर्ड कर के अपने पास रख ली थी। जिसे वह रातों में सुना करती थीं।

दरअसल, चैट शो कॉफी विद करण में जब श्वेता नंदा पहुंची थीं तो रैपिड फायर राउंड में करण ने उनसे ये सवाल किया था। श्वेता ने तब बताया था कि सलमान खान उनका टीनएज का क्रश हुआ करते थे। शो में रैपिड फायर राउंड के दौरान करण ने पूछा कि ‘इन सेलेब्स में कौन सबसे हॉट है रैंक करो। सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, ऋतिक रोशन और अजय देवगन।’ इस पर श्वेता ने सलमान खान को सबसे पहला स्थान दिया था। ऐसे में करण ने उन्हें पलट कर कहा था कि टीनएज क्रश हां।

इसके बाद श्वेता ने स्माइल करते हुए बताया था-कि जब फिल्म मैने प्यार किया आई थी तो उस कैप का बहुत चलन था। उन्हें सलमान बहुत पसंद थे, ऐसे में अभिषेक बच्चन उनके लिए वो कैप भी लाए थे जो फिल्म में सलमान भाग्यश्री को देते हैं। ऐसे में उस कैप को श्वेता अपने सिरहाने के नीचे रख कर सोती थीं। श्वेता ने आगे ये भी बताया कि उनकी फैमिली ने उन्हें पढ़ने बोर्डिंग स्कूल भेजा था।

तो वहां भी सलमान खान की दीवानगी उनके साथ थी। वह बताती हैं कि वहीं उन्होंने सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया देखी थी। जबकि उस वक्त बच्चों को फिल्में देखने की परमिशन नहीं होती थी।

ऐसे में उन्होंने एक टेप लिया और उसमें पूरी फिल्म रिकॉर्ड कर दी। उस रिकॉर्डर को श्वेता हमेशा अपने साथ रखती थीं और समय समय पर सुनती रहती थीं। इस फिल्म के डायलॉग वह रोज सुनती थीं जो उन्हें याद हो चुके थे।



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सनी देओल- अमिषा पटेल की फ़िल्म, ‘गदर’ का बनेगा सीक्वल? जानें डायरेक्टर अनिल शर्मा की क्या है राय

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सनी देओल, अमिषा पटेल की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ के प्रशंसकों के लिए एक अच्छी खबर है। इस फिल्म के सीक्वल की घोषणा जल्द ही हो सकती है। निर्देशक अनिल शर्मा ने इसके सीक्वल को बनाने पर अपनी बात रखी है और कहा है कि अभी सब कुछ शुरुआती स्टेज पर है। 2001 में आई इस फिल्म ने  लोकप्रियता के शिखर को छू लिया था। आज भी इसके गाने और डायलॉग्स लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में इसके सीक्वल का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जो अब शायद दो दशकों बाद बनने जा रहा है।

मिड डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘गदर के मेकर्स इस समय बनने वाले सिक्वल को ध्यान में रखकर प्लॉट और स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। अमीषा पटेल और सनी देओल फिल्म की कहानी का मुख्य हिस्सा होंगे। डायरेक्टर अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष फिल्म में लीड रोल में होंगे, जिन्होंने गदर फिल्म में सनी देओल के बेटे जीता की भूमिका निभाई थी।’

उत्कर्ष बॉलीवुड में बतौर हीरो फ़िल्म, ‘जीनियस’ से डेब्यू कर चुके हैं। यह फिल्म 2018 में आई थी और इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी काम किया था। डायरेक्टर अनिल शर्मा ने फिल्म के सीक्वल बनाने को लेकर कहा है, ‘गदर के सीक्वल बनाने को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सही समय पर ही मैं इसकी आधिकारिक घोषणा करूंगा। फिलहाल के लिए, चीजें अभी शुरुआती स्टेज में हैं।’

अनिल शर्मा की इस बात से यह तो स्पष्ट हो गया है कि गदर के सीक्वल पर काम चल रहा है। फिलहाल अनिल शर्मा देओल परिवार के साथ फ़िल्म ‘अपने 2′ को लेकर व्यस्त हैं। यह फ़िल्म दीवाली 2021 के आस- पास रिलीज होने वाली थी लेकिन अब खबरें हैं कि इसके रिलीज डेट को आगे बढ़ाया जा सकता है।

फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ की बात करें तो साल 2001 की ये सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। इसने सनी देओल के करियर को उछाल तो दिया था ही साथ ही अमीषा पटेल को इंडस्ट्री में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। अमीषा पटेल की यह दूसरी ही फिल्म थी और उनके सकीना के किरदार ने लोगों का दिल जीत लिया। ये फिल्म उनके करियर की सबसे यादगार फिल्म मानी जाती है।

बहू ऐश्वर्या राय को ‘ऐश’ कहकर पुकारा तो फोटोग्राफर पर भड़क गई थीं जया बच्चन, होटल वालों को भी लगा दी थी डांट

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन अपनी बहू ऐश्वर्या राय को लेकर काफी पजेसिव हैं। जया बच्चन को हमेशा ऐश्वर्या राय की तारीफ करते हुए देखा जा सकता है। एक इंटरव्यू में जया बच्चन ने कहा था कि मेरी बहू ऐश्वर्या बहुत प्यारी है और वो मेरे परिवार में पूरी तरह से घुलमिल गई है। बता दें कि जया बच्चन को ऐश्वर्या राय का अपनी बेटी के प्रति पजेसिव होना भी काफी पसंद है। ऐश्वर्या अपनी बेटी का ख्याल खुद से रखती हैं। जया बच्चन ने कहा था कि ऐश्वर्या कभी भी अपनी बेटी आराध्या को अकेले नहीं छोड़ती हैं।

ऐश्वर्या उसके नहाने से लेकर खाने-पीने की पूरी व्यवस्था करती हैं। जया बच्चन ऐश्वर्या राय को लेकर कभी तो इतनी पजेसिव हो जाती हैं कि उस दौरान वो अपना आपा भी खो देती हैं और किसी को कुछ भी सुना देती है। कई बार ऐश्वर्या राय को खुद भी जया बच्चन का इतना पजेसिव होना काफी अनकंफर्टेबल कर देता है।

‘क्या ऐश्वर्या तुम्हारी स्कूल की फ्रेंड है?’- एक बार एक फोटोग्राफर ऐश्वर्या राय का फोटोशूट कर रहा था। उसने कहा कि ‘ऐश’ कैमरे की तरफ देखिए। इस बात पर जया बच्चन उस कैमरामैन पर भड़क गईं और उससे पूछने लगीं कि ‘क्या ऐश्वर्या तुम्हारी स्कूल की फ्रेंड है?’

ऐश्वर्या के साथ फैन्स को फोटो भी नहीं लेने देती हैं जया बच्चन- एक बार जया बच्चन अपनी मां इंदिरा भादुड़ी का 90वां जन्मदिन मनाने के लिए भोपाल गई थीं। तब जया बच्चन ने भोपाल एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी गार्ड को डांट दिया था। उनका कहना था कि कोई भी धक्का मारकर चला जाता है और ये सिक्योरिटी वाले ध्यान नहीं दे रहे हैं।

दरअसल एयरपोर्ट से जब पूरा बच्चन परिवार बाहर निकल रहा था तो फैंस ने उनको घेर लिया था। इस भीड़ के कारण थोड़ा धक्का-मुक्की हो गयी थी, कुछ लोग ऐश्वर्या राय से सेल्फी लेने में धक्का-मुक्की कर रहे थे। इसपर जया बच्चन ने अपना सारा गुस्सा सिक्योरिटी गार्ड पर उतार दिया था। इतना ही नहीं, यहां से वो गुस्से में ही होटल पहुंचीं और वहां भी होटल के स्टाफ पर चिढ़ गईं। दरअसल होटल में काम करने वालों ने बच्चन परिवार के साथ सेल्फी लेना चाहा तो जया बच्चन ने यह कहकर मना कर दिया कि यह हमारा प्राइवेट टाइम है।

जया बच्चन को है क्लॉस्ट्रोफोबिया- करण जौहर के चैट शो में जब अभिषेक बच्चन और श्वेता बच्चन से जया बच्चन के गुस्सैल रवैये को लेकर सवाल पूछा गया था तो इस पर उन लोगों का कहना था कि मां को क्लॉस्ट्रोफोबिया है। बता दें कि क्लॉस्ट्रोफोबिया की स्थिति में लोगों को काफी गुस्सा आने लगता है, वो अपना आपा खोने लगते हैं।

यहां तक कि ऐसे व्यक्ति भीड़-भाड़, छोटी जगह, बंद कमरे और लिफ्ट में बेचैन हो जाते हैं। कई बार तो एंग्जाइटी और पैनिक अटैक के ट्रिगर होते ही अचानक उस व्यक्ति के दिल की धड़कन बढ़ जाती है और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है, जिससे बेहोशी के हालात भी पैदा हो जाती है।

जब पेंट के डब्बे में दिया गया खाना, रो पड़े थे वरुण शर्मा; फ़िल्म पाने के लिए करना पड़ा इतना संघर्ष

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राजकुमार राव, जान्हवी कपूर, वरुण शर्मा अभिनीत फ़िल्म, ‘रूही’ हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। कोविड महामारी के कारण बंद पड़े सिनेमाघरों के खुलने के बाद रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों में से एक रूही भी थी जो अब दर्शकों का खूब मनोरंजन कर रही है। इस फिल्म में वरुण शर्मा के किरदार लखन बेदी को खूब पसंद किया जा रहा है। हॉरर कॉमेडी फिल्म रूही में वरुण के काम को क्रिटिक्स भी पसंद कर रहे हैं। वरुण शर्मा का बॉलीवुड की बड़ी फ़िल्मों में काम करने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। उन्होंने अपने शुरुआती करियर में बहुत मुश्किलें झेली हैं।

ऑडिशन लेने का काम करते थे वरूण शर्मा- वरुण शर्मा का बॉलीवुड इंडस्ट्री से कोई कनेक्शन नहीं था लेकिन उन्हें एक्टिंग का बहुत शौक था। जब वो मुंबई आए तो उन्होंने अपने इंटर्नशिप के दौरान फ़िल्मों के ऑडिशन लेने का काम शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने प्रोडक्शन कंपनी के अंडर भी काम किया। वो शूटिंग के लिए घोड़े, ऊंट, लोगों के खाने- पीने आदि की व्यवस्था करने लगे। लेकिन वरुण को एक्टर बनना था इसलिए उन्होंने फिर अपना ऑडिशन देना शुरू किया।

वरुण शर्मा ने ज़ूम को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने बहुत रिजेक्शन झेला है। फिल्मों से लेकर उन्होंने टेली फिल्म्स के ऑडिशंस तक दिए लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था।

जब पेंट के डब्बे में खाना देख रो पड़े थे वरूण- वरुण शर्मा को इसी बीच एक फिल्म मिली जिसमें उनसे कहा गया कि वो हीरो के दोस्त का किरदार निभा रहे हैं। उनसे कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया और ट्रेन से दिल्ली शूट के लिए भेजा गया। जब वो वहां पहुंचे तब उन्हें पता चला कि उन्हें बैकग्राउंड आर्टिस्ट के लिए बुलाया गया है।

वरुण शर्मा ने अपने इस अनुभव के बारे में बताया था, ‘मैंने सोचा कि कोई बात नहीं, एक्सपीरियंस मिलेगा इसलिए कर लेते हैं। एक दिन खाने की बात आई तो उन लोगों ने हमें पेंट के डब्बे में खाना दिया। पेंट में डब्बों में चावल, दाल, सब्जी, रोटी दी गई। मेरे और मेरे कुछ दोस्तों के साथ ये किया गया। ये देखकर आधे से ज्यादा लोग रो पड़े। मेरे भी आंखों में आंसू आ गए कि यार इतना नहीं कर सकते।’

इस तरह मिली ‘फुकरे’- वरुण शर्मा को मुंबई में कई सालों तक धक्के खाने पड़े तब जाकर उन्हें साल 2013 में पहली फ़िल्म, ‘फुकरे मिली थी। फ़िल्म के डायरेक्टर मृगदीप सिंह लांबा को फिल्म के लिए एक नए लड़के की तलाश थी और इसके लिए उन्होंने वरूण शर्मा को चुना। वरुण शर्मा ने भी डायरेक्टर को निराश नहीं किया और फिल्म ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद से वरुण शर्मा को लगातार सफलता मिलती गई। दिलवाले, राब्ता, फुकरे रिटर्न्स, खानदानी शफाखाना, छिछोरे उनकी कुछ सफल फिल्में रही हैं।

अगर BJP की नहीं तो फिर सरकार किसकी है?- राकेश टिकैत से पूछा गया सवाल तो बोले- कंपनी की सरकार चल रही है देश में

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कृषि कानूनों के विरोध में किसान नेता राकेश टिकैत लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर दिख रहे हैं। वो चुनावी राज्यों में जाकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि लोग बीजेपी को वोट न दें। हाल ही में उन्होंने बंगाल में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित किया और कहा कि लोग आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP को वोट न दें। राकेश टिकैत यह भी कहते रहे हैं कि बीजेपी के नेताओं के पास अपनी कोई शक्ति नहीं है, वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। उनका कहना है कि देश में बीजेपी की सरकार नहीं बल्कि कुछेक कंपनियों की सरकार चल रही है।

हाल ही में राकेश टिकैत ने अमर उजाला से बातचीत की और कहा कि अगर देश में किसी पार्टी की सरकार होती तो अब तक बात बन गई होती। जब उनसे कहा गया कि देश में भाजपा की सरकार तो है, 303 सांसद हैं उनके। इस बात पर राकेश टिकैत ने जवाब दिया, ‘नहीं है बीजेपी की सरकार, उनके लोग तो कैद में बंद हैं। कहां बोल रहे हैं वो। कोई नहीं बोल रहा। एकाध आदमी निकल के आए तो उसे ED का और बाकी संस्थाओं का डर दिखाकर बंद कर दें ये।’

उनकी इस बात पर उनसे पूछा गया कि फिर सरकार किसकी है, अगर BJP की नहीं है तो? राकेश टिकैत का जवाब था, ‘कंपनियों की सरकार है। गोदाम किसके पहले बने। कानून बनने से पहले गोदाम बन गए। इसका मतलब पहले से ही कंपनियों को पता था कि पार्लियामेंट में क्या कानून पास होना है। कंपनी की सरकार चल रही है देश में, और हम चलने नहीं देंगे।’

राकेश टिकैत ने कहा कि एक दिन के लिए चिल्ला बोर्डर ब्लॉक किया जाएगा, कब किया जाएगा इस संबंध में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। राकेश टिकैत हमेशा कहते रहे हैं कि वो भूख पर व्यापार नहीं होने देंगे। आज फिर मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने इस बात को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘देश में एक नई विचारधारा जन्म लेगी, जो गरीबों की सुनेगी, मजदूरों की सुनेगी, किसानों की सुनेगी। दुनिया में भूख पर व्यापार न हो, हम उस कांसेप्ट पर काम करेंगे।’

राकेश टिकैत ने अपने राजनीति में आने की बात को भी सिरे से नकार दिया है और उनका कहना है कि राजनीति से देश का भला नहीं होने वाला है।

अल्पसंख्यकों पर आपकी और आडवाणी जी की राय एक या अलग? जब जावेद अख़्तर ने अटल बिहारी वाजपेयी से पूछ लिया था सवाल, मिला था ऐसा जवाब

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बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर अक्सर सेक्युलरिज्म और अल्पसंख्यों का मुद्दा उठाते दिखाई पड़ते हैं। ऐसा ही एक मौका तब आया था जब उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अल्पसंख्यकों को लेकर सवाल किया था। एक इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का हवाला देते हुए दिवंगत राजनेता वाजपेयी से पूछा था, ‘क्या अल्पसंख्यकों को लेकर आपके और आडवाणी जी के विचार एक हैं या अलग-अलग हैं? और ऐसा है तो क्यों हैं?

जावेद अख़्तर के इस सवाल का जवाब देते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि ‘हमारी पार्टी के सभी नेताओं की राय अल्पसंख्यकों को लेकर एक जैसी ही है, किसी की राय में तनिक भी अंतर नहीं है। आगे उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं। और यह दरवाजा इसलिए नहीं खोला गया है कि किसी खास समुदाय को रोका जाए, बल्कि इसलिए खोला गया है क्योंकि हमारी पार्टी ईमानदारी से चाहती है कि मुसलमान पार्टी में आए। वाजपेयी ने यह भी कहा था कि हम लोगों ने ना सिर्फ मुसलमानों के लिए पार्टी के दरवाजे खोलकर रखे हैं, बल्कि दिल के दरवाजे भी खोले हैं।

तब वाजपेयी ने कहा था- भारत सेक्युलर है और रहेगा: वाल्ड फिल्म्स इंडिया के इस इंटरव्यू के दौरान पूर्व पीएम वाजपेयी ने कहा था कि अल्पसंख्यकों के बारे में हमारी पार्टी की राय बिल्कुल दो टूक राय है, क्योंकि वो इसी देश के नागरिक हैं। अल्पसंख्यक ना सिर्फ यहां के नागरिक हैं बल्कि औरों की तरह उनका हक और जिम्मेदारियां भी बराबर ही हैं। भारत में मजहब के आधार पर ना पहले कभी भेदभाव हुआ था और ना ही आगे कभी भेदभाव होगा।

तब वाजपेयी ने यह भी कहा था कि हमारी पार्टी पहले भी कई बार कह चुकी है कि हिन्दुस्तान एक सेक्युलर स्टेट था, है और हमेशा रहेगा। इसलिए मुसलमानों को इस बात से डरने की आवश्यकता नहीं है लेकिन विरोधियों ने मुस्लिमों के मन में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर डर का वातावरण तैयार करने का काम किया है। हालांकि विरोधियों का यह खेल ज्यादा दिन नहीं चलेगा।

इसी इंटरव्यू के दौरान जावेद अख़्तर ने अटल बिहारी वाजपेयी से कहा था कि चूंकि यह आम धारणा है कि अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर आप लालकृष्ण आडवाणी से ज्यादा सहिष्णु और उदार हैं। इसी वजह से यह प्रश्न किया गया। इसपर वाजपेयी जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि आपने सवाल पूछकर अच्छा किया और मुझे लगता है अब लोगों को हमारी पार्टी के नेताओं, आडवाणी और मेरे अल्पसंख्यकों संबंधी मुद्दे पर कोई गलतफहमी नहीं रह जाएगी।


अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हैं विपक्षी: आपको बता दें कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल अक्सर नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर ही घेरते नजर आते हैं और उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाते हैं। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM जैसी पार्टियां मोदी सरकार पर मुसलमानों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का आरोप भी लगाती हैं। सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों के बीच ऐसे आरोप और मुखर हुए हैं।


फारुक अब्दुल्ला ने की वाजपेयी की तारीफ: अल्पसंख्यकों के मसले पर बीजेपी की आलोचना करने वालों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला भी शामिल हैं। हालांकि हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ करते हुए कहा था, ‘वे (वाजपेयी) देवता आदमी थे। भले ही आरएसएस से जुड़े थे लेकिन उनका मानना था कि भारत सबका है। किसी के साथ भेदभाव नहीं करते थे।

धर्मेंद्र का अपने हेटर्स को जवाब- जब बदलती नहीं फितरत, मैं कैसे बदलूंगा; देखें वीडियो

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र आए दिन अपने सोशल मीडिया पर शेरो- शायरी के जरिए फैंस से जुड़े रहते हैं। हाल के दिनों में उनके कुछ पोस्ट्स ऐसे रहे हैं जिससे उनके फैंस चिंतित हो गए हैं। यहां तक कि बॉलीवुड के उनके दोस्त भी सोच में पड़ गए हैं कि आखिर धर्मेंद्र की ऐसी पोस्ट्स के पीछे की वजह क्या है। हाल ही में उन्होंने अपने ट्विटर पर एक पोस्ट किया जिससे पढ़कर सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर भी घबरा गईं और उन्होंने धर्मेंद्र को कॉल कर उनसे 20 मिनट तक बातचीत की। धर्मेंद्र ने अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपने हेटर्स के लिए एक वीडियो शेयर किया है। धर्मेंद्र ने अपने पोस्ट में लिखा है कि किसी इंसान का नेचर नहीं बदल सकता तो मैं कैसे बदलूंगा।

इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए धर्मेंद्र ने लिखा, ‘नहीं चाहते जो, उन्हें भी चाहूंगा..ऐसा ही हूं ऐसे ही रहूंगा। बदले नहीं बदलती फितरत.. मैं कैसे बदलूंगा।’ वीडियो में धर्मेंद्र ने उनकी कमियां निकालने वालों को भी एक मैसेज दिया है। उन्होंने कहा, ‘मैं आप सबके नाम तक अब जानने लगा हूं। दुनिया के किस कोने से, किस नाम से पैगाम आते हैं, मैं जुड़ गया हूं आपसे। आप फैमिली हैं मेरी।’

धर्मेंद्र आगे कहते हैं, ‘जो कोई मुझसे नाखुश है, जो मेरी खामियों को देखते हैं, वो भी खुश रहें। मैं जुड़ा रहूंगा आप सबके साथ। अब आदत हो गई है आपकी। जिंदगी का मतलब ही खुशी से जीना है, तो खुशी से जीयो।’

धर्मेंद्र ने हाल ही में जो इमोशनल पोस्ट किया था, उसमें लिखा था, ‘शऊर न आया सादगी को मेरी, उमर भर मैं सहता आया, सहता ही आया।’ धर्मेंद्र के इस पोस्ट पर उनके फैंस ने काफी चिंता जताई है। 85 वर्षीय धर्मेंद्र को लता मंगेशकर ने भी कॉल कर देर तक बातचीत की। स्पॉटबॉय से बातचीत में धर्मेंद्र ने लता मंगेशकर से बातचीत का जिक्र किया।

उन्होंने बताया, ‘वो नाजुक पलों में से एक था। पिछला साल हम सब के लिए कुछ अच्छा नहीं रहा। मुझे मेरे परिवार ने भीड़ से दूर फॉर्महाउस में रहने के लिए कहा। मैंने लता जी से 20 मिनट तक फोन पर बातचीत की। लता जी मेरी जान हैं। लॉकडाउन में उनके गानों ने मुझे हिम्मत दी। हम अक्सर बात करते हैं।’

धर्मेंद्र ने बताया कि जब लता जी ने उनकी उदासी का कारण जानने के लिए कॉल किया तब उनकी सारी परेशानी दूर हो गई।

कभी गुलदस्तों से भरा रहता था राजेश खन्ना का कमरा, बाद में एक गुलाब भी नहीं आया; बताते हुए भावुक हो गए थे काका

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80 के दशक के सुपरस्टार राजेश खन्ना अपने आशिकाना और रूमानी अंदाज से लड़कियों के दिलों पर राज करते थे। कहा तो ये भी जाता है कि जिस सड़क से राजेश खन्ना की कार गुजरती थी, उस रास्ते पर इनकी एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम लग जाता था। लड़कियां तो इनकी कार की धूल चूम लेती थीं। यहां तक कि लड़कियां राजेख खन्ना के नाम खून से खत लिखकर भेजा करती थीं।

इतना ही नहीं, एक वक्त था जब इनके घर में फूले के गुलदस्ते रखने की जगह नहीं होती थी। पर फिर ऐसा वक्त भी आया, धीरे धीरे ये फूल आना बंद हो गए। कहते हैं जब वक्त का सिक्का चलता है और नसीब जब अपनी करवट लेता है तो आदमी उसके सामने खुद को मजबूर समझने लगता है।

अगर राजेश खन्ना टिके रहते तो अमिताभ बच्चन कभी नहीं बन पाते सदी के महानायक

वैसे तो राजेश खन्ना ने लगभग 170 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था लेकिन इसके बाद समय बदलने लगा था। चूंकि राजेश खन्ना कभी एक्शन मारधाड़ वाली फिल्में नहीं करते थे। राजेश खन्ना ने हमेशा पारिवारिक, रोमांस, इमोशन से संबंधित फिल्में कीं। ऐस में उनेके करियर पर इसका प्रभाव पड़ा। मारधाड़ एक्शन से भरपूर फिल्मों के दौर में राजेश खन्ना का क्रेज थोड़ा घटने लगा। वहीं राजेश खन्ना भी फिल्में साइन करना छोड़ चुके थे। ऐसे में इसका पूरा फायदा अमिताभ बच्चन को मिला।

यह भी कहा जाता है कि अगर राजेश खन्ना बॉलीवुड में बने रहते तो शायद अमिताभ बच्चन कभी सदी के महानायक नहीं बन पाते। हालांकि इस पर राजेश खन्ना का कहना है कि हर किसी का अपना नसीब होता है, कोई किसी की वजह से सफल या असफल नहीं होता। गौरतलब है कि राजेश खन्ना के साथ अमिताभ बच्चन ने पहली फिल्म आनंद की थी, जो अपने जमाने की सबसे सुपरहिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी।

पहले गुलदस्तों से घर भरा रहता था, अब एक गुलाब भी नहीं आता है। इसपर राजेश खन्ना ने खुद कहा था कि जब वो फिल्मों में काम करते थे, लोगों को मेरी फिल्में और एक्टिंग पसंद आती थी तो फूल भेजा करते थे लेकिन जब फिल्मों में मैंने काम करना छोड़ दिया तो लोगों ने भी धीरे-धीरे फूल भेजना कम कर दिये।

राजेश खन्ना को नहीं मिल रही थीं फिल्में, कारण था अहंकार !

एक वक्त था जब राजेश खन्ना और सलीम खान मे गहरी दोस्ती थी। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता ‘सलीम खान’ एक ज़माने के मशहूर लेखक और डायरेक्टर थे। लेकिन राजेश खन्ना के अपनी अहंकार की वजह से उनके आपसी रिश्तों में खटास आ गई थी। एक बार एक फिल्म मैगजीन में संजीव कुमार पर कवर स्टोरी थी और इस स्टोरी में सलीम खान से पूछा गया था कि एक अभिनेता के रूप में संजीव कुमार के बारे में आपकी क्या राय है तो सलीम खान ने संजीव कुमार की खूब तारीफ कर दी थी।

इस पर राजेश खन्ना ने सलीम खान से पूछा था ‘तो आपको लगता है कि संजीव कुमार बेहतर अभिनेता है।’ तो सलीम खान ने कहा ‘हां’। राजेश खन्ना ने इस पर पूछा ‘और मैं?’ यह सुनकर सलीम खान हैरान हो गए और उन्होंने कहा कि ‘यह संजीव कुमार के बारे में स्टोरी है और इस स्टोरी से आपका कोई संबंध नहीं है। अगर आपके बारे में भी कोई पूछेगा तो मैं आपकी भी तारीफ करूंगा।’ इसके बाद राजेश खन्ना ने उनकी तरफ देखा और वहां से चले गए। यह भी कहा जाता है कि इस मुलाकात के बाद राजेश खन्ना ने सलीम खान से लगभग 6 महीने तक बात नहीं की थी।

जब अमिताभ बच्चन को मिलने लगीं राजेश खन्ना की फिल्में

राजेश खन्ना के इसी अहंकार का असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ने लगा। बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘दीवार’ से अमिताभ बच्चन को एक अभिनेता के रूप में नई पहचान मिली थी। इस फिल्म को यश चोपड़ा डायरेक्टर कर रहे थे और इन्होंने सबसे पहले इस फिल्म के लिए राजेश खन्ना को ही चुना गया था। लेकिन इस फिल्म को सलीम खान ने लिखा था। सलीम खान ने यशराज को कहा कि ‘इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन ही ज्यादा परफेक्ट हैं क्योंकि मैंने राजेश खन्ना को ध्यान में रखकर यह फिल्म नहीं लिखी है। इसलिए राजेश खन्ना की जगह अमिताभ बच्चन को फिल्म में कास्ट किया जाए।’ इस तरह राजेश खन्ना को अपने व्यवहार की वजह से उनके करियर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले।

रोमांटिक और आशिकाना फिल्में ही करते थे राजेश खन्ना

राजेश खन्ना की मां हमेशा कहती थीं कि तुम पिछले जन्म में जरूर ज्यादा रोमांटिक रहे होंगे। तभी तुम्हारा अंदाज बचपन से ही आशिकाना है। राजेश खन्ना मुस्कुराते हुए कहते थे कि मां आशिकाना हूं तभी तो आशिकाना फिल्मों में काम करता हूं। पारिवारिक ड्रामा, रोमांस, इमोशन वाली फिल्में करता हूं। इतना ही नहीं, राजेश खन्ना का यह भी कहना था कि उन्होंने कभी मारधाड़ वाली फिल्मों में काम नहीं किया। हमेशा उन्होंने रोमांस वाली फिल्में कीं, क्योंकि इश्क और रोमांस से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है। इश्क खुदा है, इश्क मोहब्बत है, और इश्क सबसे महान है।

 

 

 

सुशांत सिंह को पहले ट्विटर ने किया सस्पेंड, अब खुद कह दिया अलविदा

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सुशांत का ट्विटर अकाउंट अब डिलीट है और इंस्टाग्राम पर एक स्क्रीनशॉट है जिसपर उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना लेने का फैसला लिया है. बता दें कि एक्टर सरकार के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करते नजर आते हैं.

1857 की अप्रतिम योद्धा बेगम हजरत महल

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1857 के स्वाधीनता संग्राम में जो महिलाएं पुरुषों से भी अधिक सक्रिय रहीं, उनमें बेगम हजरत महल का नाम उल्लेखनीय है। मुगलों के कमजोर होने पर कई छोटी रियासतें स्वतन्त्र हो गयीं। अवध भी उनमें से एक थी। श्रीराम के भाई लक्ष्मण के नाम पर बसा लखनऊ नगर अवध की राजधानी था।

हजरत महल वस्तुतः फैजाबाद की एक नर्तकी थी, जिसे विलासी नवाब अपनी बेगमों की सेवा के लिए लाया था; पर फिर वह उसके प्रति भी अनुरक्त हो गया। हजरत महल ने अपनी योग्यता से धीरे-धीरे सब बेगमों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर लिया। वह राजकाज के बारे में नवाब को सदा ठीक सलाह देती थी। पुत्रजन्म के बाद नवाब ने उसे ‘महल’ का सम्मान दिया।

वाजिदअली शाह संगीत, काव्य, नृत्य और शतरंज का प्रेमी था। 1847 में गद्दी पाकर उसने अपने पूर्वजों द्वारा की गयी सन्धि के अनुसार रियासत का कामकाज अंग्रेजों को दे दिया। अंग्रेजों ने रियासत को पूरी तरह हड़पने के लिए कायर और विलासी नवाब से 1854 में एक नयी सन्धि करनी चाही। हजरत महल के सुझाव पर नवाब ने इसे अस्वीकार कर दिया।

इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने नवाब को बन्दी बनाकर कोलकाता भेज दिया। इससे क्रुद्ध होकर हजरत महल ने अपने 12 वर्षीय पुत्र बिरजिस कद्र को नवाब घोषित कर दिया तथा रियासत के सभी नागरिकों को संगठित कर अंग्रेजों के विरुद्ध खुला युद्ध छेड़ दिया।

अंग्रेजों ने नवाब की सेना को भंग कर दिया था। वे सब सैनिक भी बेगम से आ मिले। बेगम स्वयं हाथी पर बैठकर युद्धक्षेत्र में जाती थी। अंततः पांच जुलाई, 1857 को अंग्रेजों के चंगुल से लखनऊ को मुक्त करा लिया गया। अब वाजिद अली शाह भी लखनऊ आ गये।

इसके बाद बेगम ने राजा बालकृष्ण राव को अपना महामंत्री घोषित कर शासन के सारे सूत्र अपने हाथ में ले लिये। उन्होंने दिल्ली में बहादुरशाह जफर को यह सब सूचना देते हुए स्वाधीनता संग्राम में पूर्ण सहयोग का वचन दिया। उन्होंने खजाने का मुंह खोलकर सैनिकों को वेतन दिया तथा महिलाओं की ‘मुक्ति सेना’ का गठन कर उसके नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था की।

एक कुशल प्रशासक होने के नाते उनकी ख्याति सब ओर फैल गयी। अवध के आसपास के हिन्दू राजा और मुसलमान नवाब उनके साथ संगठित होने लगे। वे सब मिलकर पूरे क्षेत्र से अंग्रेजों को भगाने के लिए प्रयास करने लगेे; पर दूसरी ओर नवाब की अन्य बेगमें तथा अंग्रेजों के पिट्ठू कर्मचारी मन ही मन जल रहे थे। वे भारतीय पक्ष की योजनाएं अंग्रेजों तक पहुंचाने लगे।

इससे बेगम तथा उसकी सेनाएं पराजित होने लगीं। प्रधानमंत्री बालकृष्ण राव मारे गये तथा सेनापति अहमदशाह बुरी तरह घायल हो गये। इधर दिल्ली और कानपुर के मोर्चे पर भी अंग्रेजों को सफलता मिली। इससे सैनिक हताश हो गये और अंततः बेगम को लखनऊ छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

1857 के स्वाधीनता संग्राम के बाद कई राजाओं तथा नवाबों ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली। वे उनसे निश्चित भत्ते पाकर सुख-सुविधा का जीवन जीने लगे; पर बेगम को यह स्वीकार नहीं था। वे अपने पुत्र के साथ नेपाल चली गयीं। वहां पर ही अनाम जीवन जीते हुए सात अप्रैल, 1879 को उनका देहांत हुआ। लखनऊ का मुख्य बाजार हजरत गंज तथा हजरत महल पार्क उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाये है।

(संदर्भ : स्वतंत्रता सेनानी सचित्र कोश, विकीपीडिया, भारतीय धरोहर)

आप आर्यावर्त की वीरता के शिखर थे वीर तक्षक….

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Takshak

सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवो शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं, इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के लिए कुंए तालाब में डूब मरीं।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया। भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी।

एक बालक तक्षक के पिता कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुची तो हाहाकार मच गया। स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी।भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं।
तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी, उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुच गयी। माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में चिपका लिया और रो पड़ी। फिर देखते देखते उस क्षत्राणी ने म्यान से तलवार खीचा और अपनी दोनों बेटियों का सर काट डाला।उसके बाद अरबों द्वारा उनकी काटी जा रही गाय की तरफ और बेटे की ओर अंतिम दृष्टि डाली, और तलवार को अपनी छाती में उतार लिया।
आठ वर्ष का बालक तक्षक एकाएक समय को पढ़ना सीख गया था, उसने भूमि पर पड़ी मृत माँ के आँचल से अंतिम बार अपनी आँखे पोंछी, और घर के पिछले द्वार से निकल कर खेतों से होकर जंगल में भाग गया।
25 वर्ष बीत गए। अब वह बालक बत्तीस वर्ष का पुरुष हो कर कन्नौज के प्रतापी शासक नागभट्ट द्वितीय का मुख्य अंगरक्षक था। वर्षों से किसी ने उसके चेहरे पर भावना का कोई चिन्ह नही देखा था। वह न कभी खुश होता था न कभी दुखी। उसकी आँखे सदैव प्रतिशोध की वजह से अंगारे की तरह लाल रहती थीं। उसके पराक्रम के किस्से पूरी सेना में सुने सुनाये जाते थे। अपनी तलवार के एक वार से हाथी को मार डालने वाला तक्षक सैनिकों के लिए आदर्श था। कन्नौज नरेश नागभट्ट अपने अतुल्य पराक्रम से अरबों के सफल प्रतिरोध के लिए ख्यात थे। सिंध पर शासन कर रहे अरब कई बार कन्नौज पर आक्रमण कर चुके थे,पर हर बार योद्धा राजपूत उन्हें खदेड़ देते। युद्ध के सनातन नियमों का पालन करते नागभट्ट कभी उनका पीछा नहीं करते, जिसके कारण मुस्लिम शासक आदत से मजबूर बार बार मजबूत हो कर पुनः आक्रमण करते थे। ऐसा पंद्रह वर्षों से हो रहा था।

इस बार फिर से सभा बैठी थी, अरब के खलीफा से सहयोग ले कर सिंध की विशाल सेना कन्नौज पर आक्रमण के लिए प्रस्थान कर चुकी है और संभवत: दो से तीन दिन के अंदर यह सेना कन्नौज की सीमा पर होगी। इसी सम्बंध में रणनीति बनाने के लिए महाराज नागभट्ट ने यह सभा बैठाई थी। सारे सेनाध्यक्ष अपनी अपनी राय दे रहे थे…तभी अंगरक्षक तक्षक उठ खड़ा हुआ और बोला—
महाराज, हमे इस बार दुश्मन को उसी की शैली में उत्तर देना होगा।

महाराज ने ध्यान से देखा अपने इस अंगरक्षक की ओर, बोले- “अपनी बात खुल कर कहो तक्षक, हम कुछ समझ नही पा रहे।”

“महाराज, अरब सैनिक महाबर्बर हैं, उनके साथ सनातन नियमों के अनुरूप युद्ध कर के हम अपनी प्रजा के साथ घात ही करेंगे। उनको उन्ही की शैली में हराना होगा।”

महाराज के माथे पर लकीरें उभर आयीं, बोले-
“किन्तु हम धर्म और मर्यादा नही छोड़ सकते सैनिक। “

तक्षक ने कहा-
“मर्यादा का निर्वाह उसके साथ किया जाता है जो मर्यादा का अर्थ समझते हों। ये बर्बर धर्मोन्मत्त राक्षस हैं महाराज। इनके लिए हत्या और बलात्कार ही धर्म है।”

“पर यह हमारा धर्म नही हैं बीर”

“राजा का केवल एक ही धर्म होता है महाराज, और वह है प्रजा की रक्षा। देवल और मुल्तान का युद्ध याद करें महाराज, जब कासिम की सेना ने दाहिर को पराजित करने के पश्चात प्रजा पर कितना अत्याचार किया था। ईश्वर न करे, यदि हम पराजित हुए तो बर्बर अत्याचारी अरब हमारी स्त्रियों, बच्चों और निरीह प्रजा के साथ कैसा व्यवहार करेंगे, यह आप भली भाँति जानते हैं।”

महाराज ने एक बार पूरी सभा की ओर निहारा, सबका मौन तक्षक के तर्कों से सहमत दिख रहा था। महाराज अपने मुख्य सेनापतियों मंत्रियों और तक्षक के साथ गुप्त सभाकक्ष की ओर बढ़ गए।

अगले दिवस की संध्या तक कन्नौज की पश्चिम सीमा पर दोनों सेनाओं का पड़ाव हो चूका था, और आशा थी कि अगला प्रभात एक भीषण युद्ध का साक्षी होगा।

आधी रात्रि बीत चुकी थी। अरब सेना अपने शिविर में निश्चिन्त सो रही थी। अचानक तक्षक के संचालन में कन्नौज की एक चौथाई सेना अरब शिविर पर टूट पड़ी। अरबों को किसी हिन्दू शासक से रात्रि युद्ध की आशा न थी। वे उठते,सावधान होते और हथियार सँभालते इसके पुर्व ही आधे अरब गाजर मूली की तरह काट डाले गए।

इस भयावह निशा में तक्षक का शौर्य अपनी पराकाष्ठा पर था।वह घोडा दौड़ाते जिधर निकल पड़ता उधर की भूमि शवों से पट जाती थी। आज माँ और बहनों की आत्मा को ठंडक देने का समय था….

उषा की प्रथम किरण से पुर्व अरबों की दो तिहाई सेना मारी जा चुकी थी। सुबह होते ही बची सेना पीछे भागी, किन्तु आश्चर्य! महाराज नागभट्ट अपनी शेष सेना के साथ उधर तैयार खड़े थे। दोपहर होते होते समूची अरब सेना काट डाली गयी। अपनी बर्बरता के बल पर विश्वविजय का स्वप्न देखने वाले आतंकियों को पहली बार किसी ने ऐसा उत्तर दिया था।

विजय के बाद महाराज ने अपने सभी सेनानायकों की ओर देखा, उनमे तक्षक का कहीं पता नही था।सैनिकों ने युद्धभूमि में तक्षक की खोज प्रारंभ की तो देखा-लगभग हजार अरब सैनिकों के शव के बीच तक्षक की मृत देह दमक रही थी। उसे शीघ्र उठा कर महाराज के पास लाया गया। कुछ क्षण तक इस अद्भुत योद्धा की ओर चुपचाप देखने के पश्चात महाराज नागभट्ट आगे बढ़े और तक्षक के चरणों में अपनी तलवार रख कर उसकी मृत देह को प्रणाम किया। युद्ध के पश्चात युद्धभूमि में पसरी नीरवता में भारत का वह महान सम्राट गरज उठा-

“आप आर्यावर्त की वीरता के शिखर थे तक्षक…. भारत ने अबतक मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर करना सीखा था, आप ने मातृभूमि के लिए प्राण लेना सिखा दिया। भारत युगों युगों तक आपका आभारी रहेगा।”

इतिहास साक्षी है, इस युद्ध के बाद अगले तीन शताब्दियों तक अरबों कीें भारत की तरफ आँख उठा कर देखने की हिम्मत नही हुई।
*तक्षक ने सिखाया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण दिए ही नही, लिए भी जाते है, साथ ही ये भी सिखाया कि दुष्ट सिर्फ दुष्टता की ही भाषा जानता है, इसलिए उसके दुष्टतापूर्ण कुकृत्यों का प्रत्युत्तर उसे उसकी ही भाषा में देना चाहिए अन्यथा वो आपको कमजोर ही समझता रहेगा । *